शनिवार, 17 दिसंबर 2016

बेटे भी होते हैं विदा

कौन कहता हैं की बस बेटियाँ विदा होती हैं
बेटे भी हो जो जाते हैं विदा एक दिन
मां के हाथ में एक कागज का टुकड़ा देकर
जिसमे उनका नंबर सा लिखा हैं कुछ
बूढ़ी आँखों को दे जाते हैं एक दिलासा
सेट होने पे जल्दी पास बुला लेने की आशा |
बेटे के कमरे से अब आवाज नहीं आती गाने की  
कमरे में कुछ तस्वीरे हैं कुछ अंग्रेजी टाइप की
अक्सर उनके बातो की आवाज सुनाई देती हैं |
वो अंग्रेजी गानों की कैसेट जिनको
माँ कभी फेंक दिया करती थी घर से
आज उन्ही को साज साज के रखती हैं अपने कर से |
दो रैकेट भी रखे हैं घर में और एक बैट सा भी हैं
घर की छत में पडी पडी कुछ धुंधली धुंधली दिखती हैं
साइकिल उसकी पिताजी वाली धुप में सिकती रहती हैं |
एक पुरानी बाइक जिसको जिद करके मंगवाया था
कितनी बार उधारी में फिर पापा ने बनवाया था
ढाक दी माँ ने उसको भी बस एक पुराने चद्दर से
देख के उसको माँ मुस्काए बस कमरे के अन्दर से |

कोई दोस्त जो उसका कभी आ जाये तो पापा खुश हो जाते हैं
उसकी कुछ बाते उसे फिर हसके वो बतलाते हैं |

बेटी तो जाती हैं क्युकी होती हैं वो पराया धन
गर जो बीटा चला गया तो सूना हो जाता हैं मन

             ............अम्ब्रेश 

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